बड़े नेता कैसे करते हैं
मीडिया मैनेजमेंट – वो सच जो
आप नहीं जानते |
- Media Management in Indian Politics:
- How Top Leaders Control the Narrative
आज के समय में राजनीति और मीडिया का रिश्ता सबसे ज़्यादा चर्चा में रहता है। अक्सर एक शब्द सुनने को मिलता है — “गोदी मीडिया”। विपक्ष में बैठे नेता यह आरोप लगाते हैं कि मीडिया सरकार के हाथ बिक चुकी है और उनकी बातों को जगह नहीं मिलती।
ऐसे में राजनीति में कदम रखने वाले युवा नेताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब हमारे पास न पैसा है, न सत्ता, तो मीडिया हमारा साथ कैसे देगी?
अगर मीडिया हमारे काम को दिखाएगी ही नहीं, तो पहचान कैसे बनेगी?
लेकिन सवाल यह है — क्या जो बातें हम सुनते हैं, वही पूरा सच हैं?
या हमें तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा दिखाया जाता है?
आज के इस ब्लॉग में हम मीडिया मैनेजमेंट का वह सच समझेंगे, जिसे जानने के बाद आप भी बड़े नेताओं की तरह मीडिया का सही इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्या मीडिया वाकई वोटरों को
प्रभावित करती है? |
- The Truth About Media Management in Politics: A Guide for Young Leaders
अक्सर यह माना जाता है कि न्यूज़ चैनलों पर दिखाई जाने वाली खबरें वोटर को प्रभावित करती हैं और वही तय करता है कि जनता किसे वोट देगी।
लेकिन कई सर्वे और अध्ययन यह साबित कर चुके हैं कि आज का वोटर इतना जागरूक हो चुका है कि वह न्यूज़ चैनलों को देखकर वोट नहीं करता।
कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण:
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तमिलनाडु में डीएमके के पास अपना लोकप्रिय न्यूज़ चैनल था, जहां दिन-रात पार्टी के पक्ष में खबरें चलती थीं, फिर भी पार्टी को लगातार चुनावी हार मिली।
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जयललिता की पार्टी ने भी बाद में ऐसा ही चैनल शुरू किया, लेकिन चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए।
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पंजाब में अकाली दल के पास सबसे ज्यादा देखा जाने वाला चैनल होने के बावजूद पार्टी की वर्तमान स्थिति सभी जानते हैं।
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2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में थी और मीडिया में उसे पर्याप्त कवरेज मिल रही थी, लेकिन नतीजा क्या हुआ - सिर्फ 44 सीटें ही उनके खाते में आई।
इन उदाहरणों से साफ है कि आज का मतदाता स्क्रीन देखकर बहकने वाला नहीं है।
फिर मीडिया का महत्व क्या है? |
- How Politicians Use Media Effectively in India: Media Management Guide
मीडिया वोट नहीं बनाती, लेकिन नेता की मौजूदगी और काम को जनता तक पहुंचाने का माध्यम जरूर है।
पहले नेता चुनाव जीतने के बाद पाँच साल तक गायब रहते थे, जिससे जनता नाराज़ होती थी।
आज मीडिया के कारण वोटर जानता है कि उसका नेता:
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कहाँ जा रहा है
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क्या कर रहा है
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क्षेत्र के लिए क्या काम कर रहा है
इसीलिए बड़े नेता मीडिया का इस्तेमाल अपने काम को दिखाने के लिए करते हैं, न कि वोट खरीदने के लिए।
युवा नेता मीडिया मैनेजमेंट
कैसे करें? |
- How Youth Leaders Can Manage Media Without Money or Power in Politics
असल में मीडिया का इस्तेमाल तीन मुख्य तरीकों से किया जाता है:
1️⃣ बाइट (Short Statement)
बाइट का मतलब है 30 सेकंड से 2 मिनट का छोटा और सटीक बयान।
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आंदोलन, धरना या जनसभा में मीडिया छोटे जवाब चाहती है
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अगर आप कम समय में ठोस और प्रभावी बात रख देते हैं, तो मीडिया आपको बार-बार बुलाती है
👉 युवा नेताओं के लिए यही सबसे आसान एंट्री पॉइंट है।
क्या करें?
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हर कार्यक्रम से पहले 2 मिनट की तैयारी करें
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मुद्दे पर साफ और मजबूत बात प्रभावी ढंग से रखें
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मीडिया के आसपास ही रहें ताकि बाईट लेने के लिए मीडिया को आपको ढूंढना न पड़े
2️⃣ प्रेस वार्ता
जब आप नियमित रूप से बाइट देने लगते हैं, तो अगला कदम होता है प्रेस कॉन्फ्रेंस।
इस पर हम आने वाले ब्लॉग में विस्तार से बात करेंगे।
3️⃣ इंटरव्यू
जब मीडिया आपको गंभीर और भरोसेमंद मानने लगती है, तब इंटरव्यू के मौके भी मिलते हैं।
आज के समय में बाइट क्यों सबसे ज़रूरी है?
आज हर नेशनल न्यूज़ चैनल YouTube पर मौजूद है।
मीडिया ऐसी बाइट चाहती है:
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जिस पर ज़्यादा views आएँ
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जो स्पष्ट, धारदार और मुद्दे वाली हो
इसलिए:
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देखें कि कौन-सी बाइट वायरल हो रही है
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सुनें कि नेता कैसे बोलते हैं
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उसी अनुसार अपने बोलने का अंदाज़ विकसित करें
जो लोग कहते हैं कि “मीडिया हमें दिखाती ही नहीं”, वे यह प्रयोग एक बार ज़रूर करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
मीडिया दुश्मन नहीं है, न ही कोई जादू की छड़ी।
यह एक टूल है — जिसे समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो पहचान बनती है।
👉 2 मिनट में बात रखने की कला सीखिए
👉 मुद्दे पर बोलिए
👉 धैर्य रखिए — मीडिया आपको खुद ढूंढेगी

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